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à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में मरीज को थोड़ा दूर चलने के बाद पैरों में खासकर पिंडलियों में दरà¥à¤¦ शà¥à¤°à¥‚ हो जाता है जिसको कà¥à¤²à¤¾à¤¡à¤¿à¤•ेशन कहा जाता है। जैसे-जैसे नसों में बà¥à¤²à¥‰à¤• बढ़ते जाता है तो मरीज के पैरों में लगातार दरà¥à¤¦ बना रहता है, जिसको रेसà¥à¤Ÿ पेन कहा जाता है। नस पूरी तरह बंद होने पर पैर काला होकर सड़ना शà¥à¤°à¥‚ कर देता है।
पैरों की नसों में बà¥à¤²à¥‰à¤•ेज से होता है कूलà¥à¤¹à¥‡, जांघ या पिंडली में दरà¥à¤¦ :-
पैर की रकà¥à¤¤ धमनियों की डोपलर अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड से बà¥à¤²à¥‰à¤•ेज का पता लगाते हैं। बà¥à¤²à¥‰à¤•ेज मिलने पर à¤à¤‚जियोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ की जाती है।
पेरीफेरल आरà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤¿à¤¯à¤² पैरों में खून की धमनियों में बà¥à¤²à¥‰à¤•ेज की परेशानी है। इसमें कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² व शà¥à¤—र लेवल जांचते हैं। टखने à¤à¤µà¤‚ बाजू में बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° की जांच से à¤à¤‚कल बà¥à¤°à¥‡à¤•िअल इंडेकà¥à¤¸ नापा जाता है। पैर की रकà¥à¤¤ धमनियों की डोपलर अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड से बà¥à¤²à¥‰à¤•ेज का पता लगाते हैं। बà¥à¤²à¥‰à¤•ेज मिलने पर à¤à¤‚जियोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ की जाती है।
हारà¥à¤Ÿ की बà¥à¤²à¤¡ वेसलà¥à¤¸ में बà¥à¤²à¥‰à¤•ेज के कारण कोरोनरी आरà¥à¤Ÿà¤°à¥€ डिजीज की समसà¥à¤¯à¤¾ होती है। इसी तरह पेरीफेरल आरà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤¿à¤¯à¤² डिजीज में पैरों तक खून ले जाने वाली धमनियां बà¥à¤²à¥‰à¤•ेज से सिकà¥à¤¡à¤¼ जाती हैं। इससे पैरों को बà¥à¤²à¤¡ सपà¥à¤²à¤¾à¤ˆ कम होती है। इससे थोड़ा सा चलने पर पैरों में दरà¥à¤¦ होने लगता है। यह दरà¥à¤¦ इतना जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है कि जब तक बैठकर आराम न किया जाठआगे नहीं चला जा सकता। जब बà¥à¤²à¤¡ वेसलà¥à¤¸ में थकà¥à¤•ा जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जमा हो जाता है तो बैठे हà¥à¤ à¤à¥€ पैर में दरà¥à¤¦ होता है। जब इन बà¥à¤²à¤¡ वेसलà¥à¤¸ में कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² का जमाव जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है तो पैरों में रकà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ बंद हो जाता है। à¤à¤¸à¥‡ में पैर का वो हिसà¥à¤¸à¤¾ सिकà¥à¤¡à¤¼ जाता है। काला हो जाता है। इसे गैंगà¥à¤°à¥€à¤¨ कहते हैं (पैरों में बà¥à¤²à¥‰à¤•ेज की थà¥à¤°à¥‹à¤®à¥à¤¬à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ समसà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ होती है जो दूषित रकà¥à¤¤ के पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ शिराओं में होती है)। इसमें इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ से मरीज को सेपà¥à¤Ÿà¥€à¤¸à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¥€ हो सकता है। इससे बचने के लिठपैर के उस हिसà¥à¤¸à¥‡ को काटकर अलग करना पड़ता है। इससे हृदय पर à¤à¥€ बà¥à¤°à¤¾ असर पड़ता है।
जांघ व पिंडली में दरà¥à¤¦ -
इस बीमारी में कूलà¥à¤¹à¥‡, जांघ या पिंडली में दरà¥à¤¦ होता है। बाद में पैरों का सà¥à¤¨à¥à¤¨ होना, कमजोरी, पैर में बाल कम होना, उनका रंग बदलना, सà¥à¤•िन चिकनी होना, नाखून की गà¥à¤°à¥‹à¤¥ व पैर की पलà¥à¤¸à¥‡à¤¶à¤¨ कम होना à¤à¤µà¤‚ पैर में घाव आसानी से नहीं à¤à¤°à¤¤à¤¾ है। इससे अथेरोसà¥à¤•à¥à¤²à¥‡à¤°à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ यानि बà¥à¤²à¤¡ वेसलà¥à¤¸ में कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² जमा होता है। इससे पैरों में बà¥à¤²à¤¡ ले जाने वाली वेसलà¥à¤¸ में जमा होने से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ संकà¥à¤šà¤¿à¤¤ करता है।
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